मैं उनका हूँ और वे मेरे हैं - इस भाव के दृढ़ होने पर उनकी याद अपने आप आती है और उनके बिना किसी प्रकार चैन नहीं पड़ती । वह मेरे है, इस भाव का दृढ़ होने पर उनका ध्यान अपने आप होता है ।
'I am His and He is mine' - as soon as this acceptance is firm, His remembrance will come naturally and you will not be a peace without Him.... 'He is mine', with this acceptance being firm His concentration happens by itself.
Wednesday, December 23, 2009
संसार असत् नहीं है । वह मेरे प्यारे प्रभु का स्वरूप है तो असत् कैसे हो सकता है ? उससे जो संबन्ध माना है, वह संबन्ध असत् है । वह संबन्ध रहेगा नहीं । The world is not Unreal. It is the form of my Beloved Lord - how can it be Unreal. The relation (me and mine) that we have made with it, that is Unreal. That relation will never remain.
जागो.... उठो.... अपने भीतर सोये हुए निश्चयबल को जगाओ। सर्वदेश, सर्वकाल में सर्वोत्तम आत्मबल को अर्जित करो। आत्मा में अथाह सामर्थ्य है। अपने को दीन-हीन मान बैठे तो विश्व में ऐसी कोई सत्ता नहीं जो तुम्हें ऊपर उठा सके। अपने आत्मस्वरूप में प्रतिष्ठित हो गये तो त्रिलोकी में ऐसी कोई हस्ती नहीं जो तुम्हें दबा सके।
Friday, December 4, 2009
Wednesday, November 25, 2009
rag
जब जब दुःख, मुसीबत, चिन्ता, भय घेर लें तब सावधान रहें और जान लें कि ये सब राग के ही परिवारजन हैं। उन चीजों में राग होने के कारण मुसीबत आयी है। राग तुम्हें कमजोर बना देता है। कमजोर आदमी को ही मुसीबत आती है। बलवान आदमी के पास मुसीबत आती है तो बलवान पर उसका प्रभाव नहीं पड़ता। अगर प्रभाव पड़ गया तो वह मुसीबत की अपेक्षा कमजोर है।तुम कब तक बाहर के सहारे लेते रहोगे ?
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