Sunday, March 14, 2010

राग करना है तो वैराग्य में ही राग करो , संसार का राग फँसाता है संसार की प्रीती आदमी को फँसाती है …भक्तिनिस्थ हो जाओ


ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ….

ओमम्म्म्म…
राग करना है तो वैराग्य में ही राग करो , संसार का राग फँसाता है संसार की प्रीती आदमी को फँसाती है …भक्तिनिस्थ हो जाओ


ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ….

ओमम्म्म्म…
जिसने अनुराग का दान दिया , उससे कण मांग लजाता नहीं


अपना पन भूल समाधी लगा ये पिहू का विहाग सुहाता नहीं
सो संगति जल जाये जिसमे कथा नहीं राम की


बिन खेती के बाड़ किस काम की …
लोभी धन के लिए रोता है , मोह़ी परिवार के लिए रोता है आँशु बहाता है , अहंकारी कुर्सी पद प्रतिष्ठा के लिए रोता है , लेकिन तेरा प्यारा भक्त तुझे पुकारते हुए मीरा की नाई विरह के आँशु बहाता है , धन्य हो जाता है ..पत्थर दिल तू संसार के लिए तो रोता पिघलता है , लेकिन प्रभु के लिए क्यों नहीं पिघलता

Saturday, March 13, 2010

इन प्राणी, पदार्थ, परिस्थितियों की आस्था, आशा, आकांक्षा छोड़कर प्रभु की ओर देखो। फिर सारी प्रभु-इच्छित अनुकूलता अपने-आप ही आकर तुम्हारे चरण चूमेगी। Removing your belief on these people, objects and situations - look towards God. Then all that God desires will come and kiss your feet by themselves.




हर वक्त इस बात पर प्रसन्न और आनन्द में रहे कि भगवान् आपसे मिलना चाहते है। Always be happy and in bliss because of the fact that God wants to meet you.
अगर तुम दुसरों के लिये बोलते हो, दुसरों के लिये सुनते हो, दुसरों के लिये सोचते हो, दूसरों के लिये काम करते हो, तो तुम्हारी भौतिक उन्नति होती चली जायगी। कोई बाधा नहीं डाल सकता। अगर तुम केवल अपने लिये सोचते हो तो दरिद्रता कभी नहीं जायगी

 If you speak for others, if you hear for others, if you think for others, if you work for others, then your material progress will take place constantly. No one can put any obstacle in it. But if you think only for yourself, your impoverishment (poverty) can never be removed