Thursday, April 29, 2010

भूल से उत्पन्न हुई असावधानी और असावधानी से उत्पन्न एवं पोषित दोषों को मिटाने में अपने को असमर्थ स्वीकार करना और नित्य प्राप्त,स्वत: सिद्ध निर्दोषता से निराश होना मानव-जीवन का घोर अनादर है।यह नियम है कि जो अपना आदर नहीं करता,उसका कोई आदर नहीं करता।अपने आदर का अर्थ दूसरों का अनादर नहीं है,अपितु दूसरों के अनादर से तो अपना ही अनादर होने लगता है;क्योंकि जो किसी को भी दोषी मानता है,वह स्वयं निर्दोष नहीं हो सकता।
जबतक तुम्हारा हृदय मलिन है, जबतक तुम लुक-छिपकर पाप करते हो, तबतक मानसिक अशान्ति, संताप और नरक-दुःख से कदापि नहीं बच सकते।

Wednesday, April 28, 2010

badi badi madhur badhur teri vani , badi kalyani yah vardani , sabko poavan karti ho jogi , jogi re kya jadu hai tere pyar me ,tera nam hai bhavdukh tari , tu hame lage tprurari ,sabi dev tume mi basate jogi re kya jadu hai tere pyar me
ડગમગતો પગ રાખ તું સ્થિર મુજ, દુર નજર છો ન જાયે, દૂર માર્ગ જોવા લોભ લગીર ના, મારે એક ડગલું બસ થાય, મારો જીવનપન્થ ઉજાળ
પોતાના ગુણો પોતે જ કહેવા ન જોઈએ. પણ યુક્તિપૂર્વક બીજા લોકો વર્ણવે તેમ કરવું જોઈએ
દરેક માણસના સ્વભાવની પરીક્ષા સૌથી પહેલી થાય છે, બીજા ગુણોની નહિ. કારણ કે બીજા બધા ગુણોને પાછળ રાખી દઈને માણસનો સ્વભાવ જ આગળ તરી આવે છે
वृक्ष के समान सहनशील हों।पत्थर मारनेवाले को फल दें,काटकर जला देनेवालेकी रोटी पका दें।चीरकर काट देनेवालेका दरवाजा,चौखट,छ्त बन जायँ।बिना किसी भेदके सबको छाया दें,जात-पात का भेद कुछ न मानें।